मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रयास जारी, तिलहनी व दलहनी फसलों में एसएसपी के उपयोग की सलाह
पल्लू। रबी फसलों की बुवाई के सीजन को देखते हुए कृषि विभाग की ओर से क्षेत्र में उर्वरकों एवं उन्नत किस्म के बीजों का वितरण लगातार किया जा रहा है। विभाग द्वारा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता रखते हुए निर्धारित नियमों की पालना की जा रही है। उर्वरकों की मांग अधिक और आपूर्ति कम होने के कारण डीएपी की उपलब्धता के अनुसार किसानों को एक या दो बैग वितरित किए जा रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, अब तक ग्राम सेवा सहकारी समितियों खुइयां, धानसिया, पांडूसर, कानसर और नीमला सहित क्षेत्र के अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से लगभग 2500 बैग डीएपी तथा 3500 बैग यूरिया का वितरण किया जा चुका है। विभाग द्वारा किसानों की मांग के अनुरूप उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता से प्रयास किए जा रहे हैं।
एसएसपी के उपयोग से मिलेंगे अतिरिक्त पोषक तत्व
सहायक कृषि अधिकारी रामकुमार स्वामी ने किसानों को तिलहनी एवं दलहनी फसलों में डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि एक बैग डीएपी के स्थान पर तीन बैग एसएसपी तथा एक बैग यूरिया का उपयोग किया जा सकता है। इससे फसलों को फॉस्फोरस और नाइट्रोजन के साथ सल्फर एवं कैल्शियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं।
उन्होंने बताया कि इन पोषक तत्वों से पौधों की वानस्पतिक वृद्धि, जड़ों का विकास और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही, पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी सुधार होता है।
उन्नत किस्म के बीजों का वितरण भी शुरू
रामकुमार स्वामी ने बताया कि रबी सीजन के लिए स्थानीय फसलों की उन्नत किस्मों के बीजों का वितरण भी शुरू कर दिया गया है। कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सरसों, चना, जौ और गेहूं के मिनीकिट, प्रदर्शन तथा अनुदानित बीजों के लक्ष्य निर्धारित कर आपूर्ति शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया कि ग्राम स्तरीय कृषि आदान वितरण समितियों के माध्यम से विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार चयनित पात्र किसानों को पारदर्शिता एवं प्राथमिकता के आधार पर बीज वितरित किए जाएंगे।
इस दौरान कृषि पर्यवेक्षक राजरूप, सरोज, जुगलाल बेनीवाल और कांता सहित अन्य कार्मिकों ने किसानों को रबी फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकों की जानकारी दी।
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