SBI पल्लू शाखा पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने छापेमारी कर की कार्रवाई
हनुमानगढ़/पल्लू। राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana) से जुड़ा एक बड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। हनुमानगढ़ जिले की पल्लू स्थित SBI शाखा में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की अचानक कार्रवाई के दौरान करीब 9 करोड़ रुपये के संदिग्ध बीमा क्लेम का मामला उजागर हुआ। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद कथित तौर पर यह भुगतान रुकवा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में बैंक अधिकारियों, कथित फर्जी किसानों और बीमा प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि 162 बाहरी लोगों के खाते खोलकर उन्हें “ऋणी किसान” दिखाया गया और खरीफ 2025 में मुंगफली फसल का बीमा किया गया।
162 फर्जी किसानों का नेटवर्क कैसे तैयार हुआ?
प्राथमिक जांच में सामने आया कि SBI पल्लू शाखा में कथित रूप से सुनियोजित तरीके से फर्जी बीमा नेटवर्क तैयार किया गया। आरोप है कि शाखा प्रबंधन और अन्य लोगों ने मिलकर
- 162 बाहरी व्यक्तियों के बचत खाते खोले
- उन्हें बैंक पोर्टल पर ऋणी किसान दर्शाया
- फर्जी कृषि भूमि रिकॉर्ड अपलोड किए
- फर्जी खसरा और मुरब्बा नंबर दर्ज किए
- खरीफ 2025 की मुंगफली फसल का बीमा करवाया
- करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम तैयार किया
बताया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम पर बीमा किया गया, वे कथित रूप से भूमिहीन हैं और जिन भूमि रिकॉर्ड का उपयोग किया गया, वे राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं मिले।
गजनेर तहसील रिपोर्ट ने खोली पोल
मामले की जांच के दौरान गजनेर तहसील प्रशासन की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। तहसीलदार की रिपोर्ट के अनुसार 162 नामों की सूची में दर्ज व्यक्तियों के नाम संबंधित गांवों और चकों में राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद नहीं मिले।
रिपोर्ट में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि उपयोग किए गए खसरा और मुरब्बा नंबर फर्जी पाए गए। इसके बाद पूरे मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया।
SBI शाखा में मंत्री और मैनेजर के सवाल
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा अचानक SBI पल्लू शाखा पहुंचे और शाखा प्रबंधन से सीधे सवाल किए। मंत्री ने पूछा कि क्या 162 लोगों का फसल बीमा इसी शाखा से किया गया है। शाखा प्रबंधन ने कथित तौर पर इसकी पुष्टि की। इसके बाद मंत्री ने संबंधित किसानों की कृषि भूमि और जमाबंदी रिकॉर्ड मांगे। बताया जा रहा है कि शाखा प्रबंधन मौके पर स्पष्ट दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों ने भी भूमि रिकॉर्ड दिखाने को कहा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
9 करोड़ रुपये का क्लेम रोका
कृषि मंत्री का दावा है कि इसी सप्ताह करीब 9 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम संबंधित खातों में जारी होने वाला था। कार्रवाई के बाद भुगतान रोक दिया गया। मंत्री ने कहा कि यदि राशि जारी हो जाती तो यह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े राजस्थान के सबसे बड़े घोटालों में शामिल हो सकता था।
मंत्री किरोडी लाल का बयान
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हित के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ लोग इसे लूट का माध्यम बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि:
- उच्च बैंक अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी
- शाखा प्रबंधक सहित संबंधित बैंक कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा
- 162 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ नामजद कार्रवाई होगी
- संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराया जाएगा
- फर्जी भूमि रिकॉर्ड की राजस्व जांच होगी
- बीमा कंपनी अधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाएगी
तकनीकी तौर पर कैसे हुआ कथित फर्जीवाड़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के कथित घोटालों में सामान्यतः बैंकिंग और बीमा पोर्टल स्तर पर तकनीकी हेरफेर किया जाता है।
1. सामान्य खातों को कृषि खाते दिखाना
बचत खातों को ऋणी किसान श्रेणी से जोड़ना।
2. फर्जी भूमि रिकॉर्ड अपलोड करना
खसरा, जमाबंदी और मुरब्बा नंबरों के जरिए पात्रता बनाना।
3. बीमा पोर्टल पर डेटा फीड करना
फसल बीमा पोर्टल में किसानों का डेटा अपलोड करना।
4. सामूहिक क्लेम तैयार करना
फसल नुकसान दिखाकर सामूहिक बीमा दावा तैयार करना।
5. भुगतान के बाद त्वरित निकासी
क्लेम राशि आते ही खातों से निकासी की आशंका।
सवाल जो मांगे जबाब
इस पूरे मामले ने कई गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी सवाल खड़े कर दिए हैं:
- बिना भूमि सत्यापन बीमा कैसे स्वीकृत हुआ?
- बैंक ने ऋणी किसान की पात्रता कैसे मान ली?
- बीमा कंपनी ने दस्तावेज सत्यापन क्यों नहीं किया?
- फर्जी खसरे और मुरब्बा नंबर सिस्टम में अपलोड कैसे हुए?
- क्या यह अकेली शाखा का मामला है या बड़ा नेटवर्क सक्रिय है?
प्रशासनिक हलकों में हड़कंप
मामला सामने आने के बाद बैंकिंग, कृषि और राजस्व विभागों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर पर भी रिपोर्ट तलब की जा सकती है। कृषि विभाग द्वारा नामजद मुकदमे की तैयारी शुरू कर दी गई है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े सबसे बड़े संगठित वित्तीय फर्जीवाड़ों में गिना जा सकता है।
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