✍🏻 राजस्थान सूत्र संवाददाता | 11 मई 2025
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने राजस्थान के सीमावर्ती जिलों — जैसलमेर, बाड़मेर, गंगानगर और हनुमानगढ़ — में जनजीवन को कितना और केसे प्रभावित किया है, आमजन के साथ साथ प्रशासन कैसे है मुस्तेद अपनी प्रजा को सुरक्षित रखने के लिए इसी पर आधारत ये कवर स्टोरी पेश है।
रातें बेचैन और दिन सन्नाटे में ढले
बॉर्डर से सटा जिला बाड़मेर और गंगानगर जिले के बॉर्डर के पास के गांवाें में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, हालांकी प्रभावित के बावजूद वहां के स्थानीय निवासियों का जोश और जूनून अपने फोजी भाईयों के लिए आसमान छू रहा है, उनका कहना है कि रोज के झंझट से मुक्ति मिलनी चाहिए, उसके लिए वो परेशान नहीं होंगे, और देश में आंतकवाद का सफाया करने के लिए पाकीस्तान की कमर तोड़नी जरूरी है। हालांकी बच्चें बुजुर्गों की रातें बेचेन और सन्नाटें में कट रही है। कुछ गांवों को सुरक्षित स्थानों पर शिफट किया गया है।
प्रशासन सतर्क: स्कूल बंद, लाइट्स ऑफ, साइरन ऑन
- हनुमानगढ़ जिले सहित सभी सीमावर्ती जिलों में स्कूलों की छुट्टियां आगामी आदेश तक कर दी गई हैं।
- रात्रीकालीन समय में सभी गांवों और शहरों को ‘लाइट्स ऑफ’ के निर्देश दिए गए हैं।
- कई गांवों में साइरन लगाए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को तुरंत सतर्क किया जा सके।
बॉर्डर पर सुरक्षा चौकसी चरम पर
जैसलमेर व बाड़मेर में BSF ने गश्त बढ़ा दी है, ड्रोन से निगरानी हो रही है। गंगानगर और हनुमानगढ़ में पुलिस की स्पेशल टीमें सक्रिय हैं और अपने निवासियों को प्रशासन के आदेश मानने और अफवाहों से बचने का आग्रह किया है।
बच्चों की मुस्कान में खौफ
गंगानगर के सूरतगढ़ क्षेत्र में बच्चों की उपस्थिति स्कूलों में 40% तक गिर गई है। माता-पिता बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर महसूस कर रहे हैं।
खेती-बाड़ी और व्यापार पर असर
सीमावर्ती किसान खेतों में जाने से बच रहे हैं। अनाज मंडियां सुनसान हैं। बाड़मेर में कई किसानों ने ट्रैक्टर और पम्प सुरक्षित स्थानों पर भेज दिए हैं।
जनता में भय के साथ-साथ देशभक्ति भी चरम पर
हनुमानगढ़ के कुछ गांवों में जवानों के लिए प्रार्थनाएं की हैं। हर गांव में “जय हिंद” के नारे गूंज रहे हैं, तो कहीं लोग तिरंगा फहराकर अपने हौसले ज़ाहिर कर रहे हैं।
सरकार की मुस्तैदी
राजस्थान सरकार ने सीमावर्ती इलाकों के लिए विशेष आपात योजना लागू कर दी है:
- राहत शिविरों की तैयारी शुरू
- हेल्पलाइन नंबर जारी
- ग्राम पंचायतों को सतर्कता दिशा-निर्देश
अंत में…
राजस्थान की सीमाएं सिर्फ ज़मीन नहीं, बल्कि जज़्बे की प्रतीक हैं। भारत-पाक तनाव के बीच यहां के आम नागरिक — किसान, महिलाएं, बुजुर्ग, जवान और बच्चे — सब मिलकर यह साबित कर रहे हैं कि संकट कितना भी बड़ा हो, राजस्थान का हौसला उससे कहीं ऊंचा होता है।
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