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इथेनॉल उद्योग का समर्थन करें, किसान, रोज़गार और भविष्य सुरक्षित करें। : डाॅ. महावीर पूनियां

उत्तर प्रदेश में इथेनॉल उत्पादन एक ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत है। वर्ष 2017 में जहाँ राज्य में मात्र 61 इथेनॉल डिस्टिलरी थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 97 हो गई है। यह वृद्धि न केवल औद्योगिक विस्तार का प्रतीक है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया एक दूरदर्शी कदम भी है। आज UP देश का अग्रणी इथेनॉल उत्पादक राज्य बन चुका है।

गोरखपुर नया ग्रीन एनर्जी हब

गोरखपुर क्षेत्र में इथेनॉल उद्योग ने तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं।
यहाँ केयान डिस्टिलरी, देश के निजी क्षेत्र का एक बड़ा इथेनॉल प्लांट, स्थापित हुआ है। पिपराइच और धुरियापार क्षेत्रों में भी डिस्टिलरी संचालन तेज हो रहा है।
इससे गोरखपुर न केवल औद्योगिक नक्शे पर उभरा है बल्कि ग्रीन एनर्जी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि

वित्त वर्ष 2022–23 में इथेनॉल उत्पादन में 40% की वृद्धि दर्ज की गई, और कुल उत्पादन 133.29 करोड़ लीटर तक पहुँच चुका है। यह आंकड़ा साबित करता है कि इथेनॉल नीति ने जमीन पर वास्तविक और सकारात्मक बदलाव पैदा किया है।

किसानों को सीधा लाभ

नई डिस्टिलरीज़ के कारण गन्ने की खपत बढ़ी है, जिससे किसानों को दो प्रमुख लाभ हुए-
1. गन्ना भुगतान में तेजी,
2. आय में सतत वृद्धि।
कई क्षेत्रों में किसान पहली बार अपनी फसल को लेकर इतने आश्वस्त हुए हैं कि उन्हें मंडियों के चक्कर न के बराबर लगाने पड़ते हैं।

टिब्बी एथेनॉल फैक्ट्री (हनुमानगढ़) का विरोध-एक बड़ा दुर्भाग्य

ऐसी स्थिति में, हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी एथेनॉल फैक्ट्री का राजनीतिकरण कर उसके विरुद्ध विरोध करना किसानों के हितों के बिल्कुल विपरीत कदम है।
यह वही राजनीतिक मानसिकता है जिसने कभी पश्चिम बंगाल को उद्योग विरोधी आंदोलन की राह पर धकेला था, और आज परिणाम सबके सामने है।
असीम संभावनाओं वाला बंगाल, देश के पिछड़े राज्यों में गिना जा रहा है।

यदि किसान प्रगति चाहते हैं, तो उन्हें समझना होगा कि
उद्योग विरोध का मतलब है अवसरों का विरोध,
रोजगार के रास्तों को बंद करना,
चावल व कृषि आधारित आय को रोकना,
और क्षेत्रीय विकास को पीछे धकेलना।

किसानों के लिए संदेश

आज किसान समुदाय को गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है।
विरोध के नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने वाली ताकतें किसानों की भलाई कभी नहीं चाहतीं।

👉 ऐसी विरोधी शक्तियों को तनिक भी सहयोग न दें।
👉 विकास, उद्योग और रोजगार के साथ खड़े होकर ही क्षेत्र आगे बढ़ सकता है।

इथेनॉल उद्योग किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ऊर्जा भविष्य तीनों को नई दिशा देने वाला मार्ग है। अतः इसे समर्थन देना ही समय की मांग है।

लेखक: डॉ महावीर प्रसाद पूनियांं (शिक्षाविद्)
सह संयोजक – अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान गंगानगर विभाग

Disclaimer: यह लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है, जिनसे राजस्थान सूत्र का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

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