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SIR में ECI की ग्राउंड रिपोर्ट: बंगाल में 10 लाख से अधिक नाम कटने की संभावना!

कोलकाता, 24 नवम्बर 2025 —

Election Commission of India (ECI) की चल रही विशेष intensive मतदाता सूची समीक्षा प्रक्रिया Special Intensive Revision (SIR) के दौरान पश्चिम बंगाल में 10 लाख से भी अधिक नामों को हटाने का अनुमान सामने आया है।

क्या है रिपोर्ट में

सीईओ, पश्चिम बंगाल कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया है कि अब तक मिले डेटाबेस और फॉर्म-अपलोड आंकड़ों के आधार पर ECI ने लगभग 10.3 लाख “un-collectable” फॉर्म्स की पहचान की है, जिनमें मृत, दोहराए गए, राज्य छोड़ने वाले या पता नहीं लगाने योग्य वोटर शामिल हैं।

इस श्रेणी में अकेले मृत वोटर्स की संख्या करीब 6.5 लाख है।

अब तक कुल लगभग 4.5 करोड़ फॉर्म्स में से 59.4 % (लगभग 2.4 % यानी 18.6 लाख) फॉर्म्स पुराने SIR-2002 सूची से मैप नहीं हो पाए हैं।


क्यों यह महत्वपूर्ण है

मतदाता सूची में व्यापक सफाई का दावा किया जा रहा है — ECI का उद्देश्य “error-free, transparent” वोटर्स लिस्ट तैयार करना है।

लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि इस समीक्षा से निर्वाचित वोटर्स की संख्या कम हो सकती है, विशेषकर प्रवासी, अल्पसंख्यक या माईग्रेंट श्रमिकों के लिए।

अगर 10 लाख से अधिक नाम वास्तव में हटते हैं, तो यह अगले विधानसभा (2026) एवं अन्य चुनावों में बीजेपी, TMC जैसे प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है।


कौन कह रहा है क्या?

ECI ने कहा है कि genuine मतदाता को बाहर नहीं रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को “अत्यधिक, अनियोजित” बताया है और कहा है कि यह NRC (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) की तैयारी जैसा हो सकता है।


अगले कदम

राज्य में 4 दिसंबर तक फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि है। जिन फॉर्म्स को अभी नहीं मिला है, उन्हें BLO द्वारा संपर्क किया जाएगा।

9 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी। उसके बाद आपत्तियों-दावे की प्रक्रिया और नाम कटने या जोड़ने की संभावना खुलेगी।

अगर तय संख्या में नाम कटते हैं, तो राजनीतिक दलों, नागरिक समाज और अदालतों द्वारा प्रक्रिया की निगरानी और सवाल उठाए जाने की संभावना है।


निष्कर्ष

एसआईआर अभियान वास्तव में व्यापक प्रशासनिक समीक्षा का हिस्सा है लेकिन वर्तमान आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में अकेले ही लाखों मतदाताओं के नाम हटने की संभावना है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वास-स्तर, चुनावी रणनीति और सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से बड़ी चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है। सवाल उठते हैं — क्या समीक्षा समयबद्ध, पारदर्शी और कम-प्रभावित लोगों को जोखिम में डाले बिना हो रही है या नहीं।

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