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ECI का SIR अभियान और BLOs पर दबाव — एक गंभीर सवाल!

Special Intensive Revision (SIR) अभियान के तहत भारत में मतदाता सूची को पुनः समीक्षा और अद्यतन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) बड़ी भूमिका निभा रहे हैं घर-घर जाकर फॉर्म बांटना, सत्यापन करना और डेटा अंकित करना।

लेकिन इस फील्ड वर्क के दबाव और लंबी जिम्मेदारियों के कारण अब तक कई राज्यों में BLOs की मौतें और आत्महत्याएँ सामने आ चुकी हैं। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में एक महिला BLO ने सुसाइड नोट में काम के दबाव को मुख्य कारण बताया।

क्या हुआ

राजस्थान में SIR प्रक्रिया के चलते दो BLOs तथा एक सुपरवाइज़र की मृत्यु हुई है।

पश्चिम बंगाल में नादिया जिले की एक महिला BLO ने आत्महत्या की, उनकी फैमिली ने “अत्यधिक SIR दबाव” और असहनीय कामभार का आरोप लगाया।

BLOs ने शिकायत की है कि उन्हें एक-एक बूथ में हजारों वोटर्स के बीच सर्वे करना पड़ रहा है, दैनिक लक्ष्य पूरा करना कठिन है और कई घंटों तक काम करना पड़ रहा है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BLOs इस प्रक्रिया में सीधे जनता से संपर्क में हैं। उनकी सुरक्षा, काम की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी से चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।

अगर सरकारी कर्मियों को असमय या अस्वाभाविक कार्यभार देना पड़ रहा है, तो यह संस्थागत व्यवस्था और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा है।

घटनाओं से यह सवाल उठ रहा है कि SIR अभियान कितना व्यावहारिक, सुरक्षित और कर्मचारियों के लिए उचित संसाधन-सहायता के साथ है।

चुनौतियाँ और आरोप

लगातार लक्ष्यों और समयसीमा के बीच काम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन BLOs ने कहा है कि वे 700-1 500 वोटर्स वाले बूथों में 3 बार घर-घर जाना पड़ रहा है।

तकनीकी ऐप, फॉर्म वितरण-संग्रह, उपयुक्त प्रशिक्षण की कमी और असमय काम का दबाव प्रमुख समस्याएँ हैं।

अक्सर सरकार ने कथित रूप से सहायक संसाधन नहीं दिए, और वरिष्ठ अधिकारी समर्थन कम दिखे।

अभी तक “19 दिन में 6 राज्यों में 15 BLO की मौत” जैसा एक आधिकारिक डेटा सार्वजनिक नहीं हुआ है कि हर राज्य में कितनी मौतें हुई हैं।

लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में कई राज्यों में मौत और आत्महत्या का सिलसिला दिख रहा है, जिससे आयोग और सरकार को कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।

उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में सीएम ने SIR प्रक्रिया के बारे में चिंता जताई और निर्वाचन आयोग से समीक्षा की मांग की है।

आगे क्या होगा

निर्वाचन आयोग को स्थिति का पूरा आंकलन करना होगा — BLOs के कामकाज, समयसीमा, संसाधनों और सुरक्षा-प्रबंधन का।

राज्यों द्वारा BLOs के लिए बेहतर समर्थन, छोटे-छोटे लक्ष्य, पर्याप्त आराम व संसाधन सुनिश्चित करना होगा।

यदि मृत्यु या आत्महत्या के मामलों में “काम की प्रकृति से सीधे लिंक” पाया जाता है, तो यह कानून-नीति स्तर पर अनुकरणीय बदलाव का कारण बन सकता है।

साथ ही, मतदाता सूची-सुधार अभियान की विश्वसनीयता भी इन घटनाओं से प्रभावित हो सकती है, इसलिए जनता-विश्वास बरकरार रखना जरूरी होगा।

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