पल्लू थाने में हंगामा व धरना प्रदर्शन करने वाले शीर्ष नेताओं पर पल्लू पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि महिला हेड कॉन्स्टेबल से अभद्रता, जातिगत टिप्पणी और थाने में राजकार्य बाधा डाली गई। घटना के बाद पुलिस ने दो नामजद व एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 30 अक्टूबर की सुबह की है। उस समय हेड कॉन्स्टेबल सुमन मीणा और संतरी मनीषा कंवर ड्यूटी पर तैनात थीं। इसी दौरान सुभाष सिहाग निवासी उदासर अपने 10–15 साथियों के साथ रिपोर्ट देने थाने आया। ड्यूटी पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें स्वागत कक्ष में बैठने को कहा, लेकिन उन्होंने थाने के अंदर जबरन प्रवेश करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख एसएचओ बाहर आए और मौके पर रिपोर्ट लिखने के बाद हस्ताक्षर करवाने के लिए रिपोर्ट हेड कॉन्स्टेबल सुमन मीणा को दी। इसी बीच महावीर सहारण निवासी बिसरासर भी थाने पहुंचे और हस्ताक्षर के दौरान महिला कॉन्स्टेबल से जातिसूचक टिप्पणी की। उन्होने ड्यूटी पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों को धमकाया और थाने के काम में बाधा उत्पन्न की। इसके बाद आरोप है कि करीब 15–20 लोगों के साथ थाने परिसर में धरने पर बैठ गये और थानेदार सहित पूरे स्टाफ को सार्वजनिक रूप से धमकाने लगे। महिला हेड कॉन्स्टेबल सुमन मीणा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आरोपी ने न केवल राजकार्य में बाधा डाली, बल्कि महिला अधिकारी के प्रति जातिगत अपशब्द कहे और पूरे पुलिस विभाग को अपमानित किया। घटना की सूचना पर सीओ नोहर संजीव कटेवा मौके पर पहुंचे और समझाइश की, लेकिन आरोपियों ने मानने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि सीरासर गांव एक एक किसान की ट्रैक्टर पलटने से मौत के बाद उसकी मर्ग दर्ज कराने में पुलिस की सुस्ती के बाद मृतक के परिजनों के साथ पहुंचे जनप्रतिनिधियों के साथ हुई कथित खींचतान के बाद पुलिस व पीडित पक्ष आमने सामने हो गये थे, जिसके बाद थाना परिसर में उपजे विवाद के बाद इस खींचतान ने धरने का रूप ले लिया था, दो दिन चले धरने में नोहर विधायक अमित चाचाण व स्थानीय जन प्रतिनिधियों व मृतक के परिजनों के मध्य हई वार्ता के बाद शुक्रवार को ही धरना समाप्त किया गया था।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने महावीर सहारण, सुभाष सिहाग और एक अज्ञात अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 121(1), 132, 352, बीएनएस तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(s), 3(2)(va) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच नोहर सर्कल सीओ संजीन कटेवा को सौंपी गई है।
यह जनता की आवाज दबाने का प्रयास
इस मुकदमें की सुचना के बाद क्षेत्र में अलग अलग कयास लगाये जाने लगे, किसी ने पुलिस की इस कार्रवाई को जनभावना को दबाने की कार्रवाई बताई तो किसी ने राजनिती से प्रेरित बताया। जनप्रतिनिधियों ने इसे पुलिस को अपनी कार्य करने की क्षमता में विफलता बताई और कहा की पल्लू क्षेत्र में चोरी की बडी घटनाएं पुलिस की पकड से बाहर है और आवाज उठाने वालों के खिलाफ इस प्रकार मुकदमा दर्ज कर उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है। मगर ये जनता की आवाज है ये दबेगी नहीं और उभरेगी।
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