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पुनर्जन्म के लिए, कांग्रेस का मरना ज़रूरी है!

लगातार सत्ता का भोग कर चुके कांग्रेस के नेताओं को अगर यह लगता है कि पार्टी को केवल नेहरू-इंदिरा गांधी परिवार का सदस्य ही सत्ता दिला सकता है, तो फिर प्रियंका गांधी को आज़माने में कोई हर्ज़ नहीं है। प्रियंका गांधी को कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सौंप पार्टी को लड़ने के काबिल बनाने की कोशिश करने में बुराई भी क्या है!

निष्प्राण होती कांग्रेस में फिर से प्राणों का संचार करने के लिए नए प्रयोग करके देखने में नुकसान भी क्या है! परंतु ऐसे प्रयोग तभी सफल हो सकेंगे जब कांग्रेस के पुराने दिग्गज सत्ता का मोह त्याग संगठन में काम करेंगे। जिस प्रकार की शक्ति सत्ता पाने और फिर उसे बचाने में लगाई जाती है, वैसी ही ताकत कांग्रेस को फिर से चलने लायक बनाने में लगाएंगे।

फिलहाल कांग्रेस लड़ना भूल चुकी है। कांग्रेस नेता अब विरोधी पार्टी के साथ लड़ने की बजाय अंदरखाने खुद आपस में ही गुत्थमगुत्था हैं। जिसका परिणाम हर चुनाव में कांग्रेस की पराजय, कांग्रेस से दूर होते उसके नेता, निराश होता कांग्रेस से जुड़ा युवा वर्ग। सालों-साल कांग्रेस के नाम पर सत्ता का स्वाद चख चुके नेता आज भी सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं।

नेतृत्व की दूसरी, तीसरी पीढ़ी को सत्ता हस्तांतरण करने को राज़ी नहीं। ऐसे में नतीजा वही आएगा, जो आ रहा है। सत्ता भी हाथ से जा रही है और नेता भी हाथ छोड़ रहे हैं। नेता इसलिए छोड़ रहे हैं क्योंकि वे सत्ता के बिना रह नहीं सकते। प्रियंका गांधी को कांग्रेस का नेतृत्व देने से निश्चित रूप से संगठन में नया उत्साह पैदा होगा।

बीजेपी से लेकर मीडिया में जिस प्रकार से राहुल गांधी की छवि बन चुकी है, वह जल्दी से मिटने वाली नहीं है। बेशक उनकी यात्राओं ने लोगों का ध्यान उनकी ओर खींचा है, किंतु अभी भी राहुल गांधी को आगे रख कांग्रेस बड़ी सफलता प्राप्त कर सकेगी, इसमें संदेह है।

ऐसे में कांग्रेस के पास एकमात्र विकल्प प्रियंका गांधी है। हां, कांग्रेस नेता नेहरू-गांधी परिवार से इतर नेतृत्व चाहते हैं, तो फिर अनेक नेता और भी हो सकते हैं। कांग्रेस अपने अंदर परिवर्तन किए बिना बहुत कुछ क्या, कुछ भी पाने की स्थिति में नहीं है। परिवर्तन तो करने ही पड़ेंगे।

इतना ही नहीं, कांग्रेस नेताओं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को राजनीतिक लड़ाई लड़ने की कला बीजेपी से सीखनी होगी। कैसे बीजेपी एक के बाद एक चुनाव जीत रही है, इसका विश्लेषण कांग्रेस को करना चाहिए। न केवल विश्लेषण करना चाहिए, बल्कि कमियों को दूर कर उस बिंदु पर फोकस करना चाहिए, जो चुनाव जीतने के लिए ज़रूरी है।

बीजेपी के लिए कोई भी चुनाव छोटा नहीं होता। हर चुनाव में ताकत झोंक देनी चाहिए, क्योंकि लड़ाई दुश्मन के व्यूह के अनुसार लड़ी जाती है। छोटी-मोटी जीत कांग्रेस का हौसला बढ़ा सकती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में जीते हुए विधायकों को साथ रखना बड़ी चुनौती है।

और कम शब्दों में इतना ही कि कांग्रेस के पुनर्जन्म के लिए कांग्रेस का मरना बहुत ज़रूरी है। प्रयोग सफल हो गए तो सोने पर सुहागा, वरना पार्टी निष्प्राण तो हो ही चुकी है। देश में जिस प्रकार मज़बूत सरकार ज़रूरी है, उसी प्रकार मज़बूत विपक्ष भी आवश्यक है।[समाप्त][नोट- यह मेरा पुराना आलेख है; आज फिर से पोस्ट किया है; मामूली संपादन के बाद]

~ गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर
स्वतंत्र पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
मो. 9414246080

(Disclaimer: यह आलेख लेखक के निजी विचार है। RajasthanSutra.com या इसका प्रबंधन मंडल इन विचारों से आवश्यक नहीं कि सहमत हो। यह सामग्री सूचना एवं वैचारिक विमर्श के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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