यमुनानगर (हरियाणा) — 6 नवम्बर 2025 | गुरुवार सुबह करीब 8 बजे, Haryana Roadways की एक बस यमुनानगर जिले के प्रतापनगर बस अड्डे पर इतनी जल्दी मोड़ी गई कि चढ़ने की भीड़ में खड़ी 6 छात्राएं इसके पीछे के पहिए के नीचे आ गईं। शिक्षा-स्वरूप सफर पर निकली वे हादसे की चपेट में आ गईं।
बस पांवटा साहिब से दिल्ली की ओर जा रही थी और प्रतापनगर बस अड्डे पर पहुंची। आये समय बस पूरी तरह रुक नहीं पाई थी जब छात्राएं चढ़ने लगी थीं।
चढ़ने की हड़बड़ी में धक्का लगा, 6 छात्राएं बस के पिछले टायर के नीचे आ गईं। उनमें नाम आरती (गाँव कुटीपुर), अर्चिता (प्रतापनगर), मुस्कान (टिब्बी), संजना (बहादुरपुर), अंजलि व अमनदीप (प्रतापनगर) शामिल हैं।
इन सभी को पहले प्रतापनगर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) ले जाया गया, फिर गंभीर स्थिति में कुछ को यमुनानगर सिविल अस्पताल रेफर किया गया।
अभिभावकों और छात्राओं का कहना है कि इस रूट पर बसों की संख्या बहुत कम है। सुबह-सुबह करीब 300 छात्र-छात्राएं बस स्टैंड पर होती हैं लेकिन बसें कम आती है, जिससे चढ़ने-उतरने में खतरनाक स्थिति बन जाती है।
हादसे के बाद छात्र-छात्राओं व अभिभावकों ने बस अड्डे पर हंगामा किया, बसों को जाने नहीं दिया गया। पुलिस ने ड्राइवर व कंडक्टर को हिरासत में लिया है, मेडिकल करवाया जाएगा।
ड्राइवर का कहना है कि जल्दीबाजी में छात्राएं नीचे गिर गईं। लेकिन छात्राओं का कहना है कि बस अभी पूरी तरह नहीं रुकी थी कि उसने मोड़ ले लिया और पीछे की ओर टायर उनके ऊपर गया।
इस तरह की दुर्घटनाएं अक्सर सार्वजनिक परिवहन में अध संख्यक बसों, भीड़भाड़, और जोखिमपूर्ण चढ़ाई-उतराई की वजह से होती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण-असहाय रूट्स पर बस सेवा सीमित होती है और छात्र किसी दूसरे विकल्प (जैसे अलग टैक्सी/कैब) की ओर मजबूर होते हैं, जो खर्च बढ़ा देते हैं। इस मामले में भी छात्राओं पर मासिक लगभग ₹2,000 की प्राइवेट कैब का भार है जबकि सरकारी बसें मुफ्त हैं।
इस हादसे ने छात्रों की रोज-मर्रा की आवाजाही की असुरक्षा को उजागर किया है। अगर बस सेवा पर्याप्त नहीं हुई, तो जोखिमित चढ़ाई-उतराई में ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं। अब सवाल है कि प्रशासन जल्दी कितनी बसें जारी करेगा, चढ़ाई-उतराई के समय सुरक्षा उपाय कैसे सुनिश्चित होंगे, और बस स्टैंड पर भीड़-व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे।
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