जयपुर, 5 नवंबर 2025 । राजस्थान में पंचायत चुनाव एक बार फिर टल गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य पूरे होने तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं है। ताज़ा जानकारी के अनुसार अब यह प्रक्रिया फरवरी 2026 के बाद ही पूरी हो पाएगी।
चुनाव टलने से प्रशासनिक उलझन
राज्य की लगभग 11 हज़ार ग्राम पंचायतों में सरपंचों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इन पंचायतों में प्रशासनिक कार्य अस्थायी रूप से नियुक्त अधिकारियों के ज़रिए चल रहे हैं। इससे ग्रामीण विकास योजनाओं और स्थानीय निर्णयों की गति प्रभावित हुई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, परिसीमन और मतदाता सूची के अद्यतन में तकनीकी अड़चनों के चलते चुनाव की तैयारी अधर में है। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र मतदाताओं की नई सूची तैयार करने का काम अभी जारी है।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़
पंचायत चुनावों में देरी को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल गरम है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने इसे “जनादेश से भागने” की कोशिश बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि आयोग स्वतंत्र है और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए समय लेना ज़रूरी है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि संविधान के अनुच्छेद 243-E और 243-U के तहत स्थानीय निकायों के चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है। न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग से इस देरी पर स्पष्टीकरण मांगा है।
ग्रामीण राजनीति पर असर
गांवों में पहले से चुनावी तैयारियों में जुटे संभावित प्रत्याशी अब असमंजस में हैं। कई पंचायतों में चुनावी प्रचार शुरू हो चुका है, पर तारीखें आगे बढ़ने से राजनीतिक गतिविधियाँ धीमी पड़ गई हैं। नेता भी असमंजस में है।
कुछ पंचायतों में लोगों ने विरोध भी जताया है कि विकास कार्यों पर रोक लगी हुई है, जबकि कई जगहों पर सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति से निर्णय-प्रक्रिया में देरी हो रही है।
आगे क्या?
राज्य निर्वाचन आयोग फरवरी 2026 तक मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन करने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित करेगा। अनुमान है कि पंचायत चुनावों की नई तिथि मार्च-अप्रैल 2026 के बीच तय की जा सकती है।
राज्य सरकार का कहना है कि इस बार चुनाव “पारदर्शी और तकनीकी रूप से अद्यतन प्रणाली” से होंगे ताकि भविष्य में देरी की स्थिति न बने।
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