... पीपल बना दूल्हा, खेजड़ी बनी दुल्हन: बिसरासर गांव में प्रकृति प्रेम की मिसाल बनी अनोखी शादी - Rajasthan Sutra
पीपल और शमी वृक्ष का विवाह समारोह – बिसरासर गांव, हनुमानगढ़

पीपल बना दूल्हा, खेजड़ी बनी दुल्हन: बिसरासर गांव में प्रकृति प्रेम की मिसाल बनी अनोखी शादी

पल्लू (हनुमानगढ़), 13 मई: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गांव बिसरासर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक ऐसा विवाह संपन्न हुआ, जिसने न केवल गांव वालों को आश्चर्यचकित किया बल्कि प्रकृति प्रेम की एक अनुपम मिसाल भी पेश की। इस अनूठे विवाह में दूल्हा बना पीपल का वृक्ष, और दुल्हन बनी शमी (खेजड़ी) का पेड़।

विवाह पूरे वैदिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार किया गया, जिसमें गांव के सैकड़ों लोग साक्षी बने। इस आयोजन को कुलड़िया परिवार द्वारा आयोजित किया गया। परिवार के मुखिया श्री जैसाराम कुलड़िया की अंतिम इच्छा थी कि पीपल के वृक्ष का विवाह कर हिंदू संस्कृति की परंपरा को जीवंत किया जाए।

‘पीपल रो व्याव’ – छपवाया गया विशेष निमंत्रण पत्र

विवाह के लिए विशेष कार्ड छपवाए गए, जिन पर लिखा था – ‘पीपल रो व्याव’। यह कार्ड पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना और इससे लोगों को आमंत्रित किया गया।

400 साल पुराने ठाकुरजी मंदिर से आई बारात

ठाकुरजी मंदिर से शुरू हुई बारात ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वेशभूषा के साथ पीपल वृक्ष तक पहुंची। वहां शमी वृक्ष के समीप वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की रस्में निभाई गईं।

दहेज में दिए गए आभूषण और गृहस्थी का सामान

ठाकुरजी को वर मानते हुए प्रतीकात्मक रूप से सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन और गृहस्थी का सामान दहेज में भेंट किया गया। सोमवार को प्रसादी का आयोजन भी किया गया।

प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा

रामेश्वर लाल कुलड़िया ने बताया कि यह आयोजन उनके पिता की स्मृति में किया गया, जो जीवनभर प्रकृति से प्रेम करते रहे।

आयोजन समिति में शामिल रहे:

लेखराम, मनीराम, आशाराम, भजनलाल, रामेश्वर लाल, राजेंद्र, रामकुमार, सुरजीत, ओमप्रकाश, मोहर सिंह, राजपाल, रोहिताश, दलीप सहित कुलड़िया परिवार और गांव के अन्य सम्मानित नागरिक।

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