हनुमानगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है। फार्मर आईडी को अनिवार्य किए जाने और तकनीकी समस्याओं के कारण हनुमानगढ़ जिले के कई किसान योजना का लाभ नहीं ले सके।
जानकारी के अनुसार जिन किसानों की फार्मर आईडी पहले से नहीं बनी थी, उन्होंने अंतिम समय में ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से आईडी बनवाने का प्रयास किया, लेकिन पोर्टल पर अधिक दबाव और सर्वर स्लो होने के कारण कई मामलों में प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इससे बड़ी संख्या में किसान फसल बीमा आवेदन से वंचित रह गए।
इसके अलावा एक और बड़ी समस्या सामने आई। कई किसानों के फसल बीमा आवेदन ई-मित्र केंद्रों पर ऑनलाइन तो दर्ज हो गए, लेकिन अंतिम समय पर पेमेंट सर्वर में तकनीकी खराबी आ जाने से ई-मित्र संचालक पॉलिसी का भुगतान नहीं कर सके। भुगतान नहीं होने के कारण इन किसानों की पॉलिसी जनरेट नहीं हो पाई और वे भी योजना के लाभ से बाहर रह गए। इस स्थिति को किसानों ने “दोहरी मार” बताया है, जहां आवेदन होने के बावजूद केवल तकनीकी कारण से बीमा नहीं हो सका।
ई-मित्र संचालकों का कहना है कि अंतिम दिन बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे, लेकिन पेमेंट गेटवे बार-बार फेल होने, ट्रांजेक्शन अटकने और राशि कटौती के बाद भी रसीद न बनने जैसी समस्याएं सामने आईं। इससे किसानों और संचालकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस स्थिति से इमित्र संचालकों पर किसानों का भरोसा टूटने की नौबत आई है। ईमित्र संचालको की मांग है कि पेमेंट से वंचित पोलिसियों का पेमेंट ओप्शन शुरू किया जावे। वहीं किसानों का कहना है कि फार्मर आईडी की अनिवार्यता की जानकारी समय रहते सभी तक नहीं पहुंच पाई, जिससे अंतिम समय में भीड़ बढ़ गई और परेशानी और अधिक हो गई।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन मामलों में आवेदन दर्ज हो चुका है या पेमेंट सर्वर की वजह से भुगतान नहीं हो सका, उन्हें विशेष राहत दी जाए और फसल बीमा के लिए अतिरिक्त समय या वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराया जाए।
फिलहाल कृषि विभाग की ओर से समय सीमा बढ़ाने या तकनीकी समस्याओं से प्रभावित किसानों के लिए किसी विशेष राहत की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। विभागीय स्तर पर शिकायतें एकत्र की जा रही हैं । यह स्थिति दर्शाती है कि योजनाओं में डिजिटल प्रक्रिया लागू करते समय तकनीकी व्यवस्था और समय पर सूचना प्रसार को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहना पड़े I
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